May 11, 2020

द इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता पर उठे सवाल, लिखा प्रोपेगेंडा से भरा लेख

द इंडियन एक्सप्रेस देश की जानी मानी मीडिया हाउस में से एक है पिछले कुछ दिनों से भ्रामक खबरें फैला कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस ने 9 मई को एक लेख लिखा था। जिसमें उन्होंने यह बताया कि पुलिस की जानकारी के अनुसार मौलाना साद का वायरल ऑडियो क्लिप झूठा है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने अपने लेख में लिखा कि मरकज निजामुद्दीन का मुखिया मौलाना साद का वायरल ऑडियो की जांच-पड़ताल में दिल्ली पुलिस ने पाया कि मौलाना साद का वायरल ऑडियो डॉक्टर्ड है। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों का आधार बताते हुए लिखा कि पुलिस ने मरकज से जो लैपटॉप बरामद किया था उसमें 350 से ज्यादा ऑडियो क्लिप थे जिन्हें जोड़कर वायरल ऑडियो को बनाया गया था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 21 मार्च को व्हाट्सएप पर मौलाना साद का एक ऑडियो वायरल हो रहा था जिसमें मौलाना साद मरकज में अपने अनुयायियों से सरकार द्वारा जारी सोशल डिस्टेंसिंग को ना मानने और धार्मिक कार्यों के लिए एकजुट होने की बात कही थी।
द इंडियन एक्सप्रेस ने अपने इसलिए की जानकारी ट्विटर पर दी जिस पर दिल्ली पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को भ्रामक और गलत जानकारी देने वाला बताया। दिल्ली पुलिस ने द इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट को आधारहीन और मनगढ़ंत बताया। और रिपोर्ट के सभी दावों का खंडन करते हुए स्पष्टीकरण मांगा।
इससे द इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकारिता पर कई सवाल उठते हैं। क्या द इंडियन एक्सप्रेस को अपने मर्यादाओं का पता नहीं है? क्या द इंडियन एक्सप्रेस पत्रकारिता के सिद्धांत और उद्देश्य को भूल चुका है? क्या द इंडियन एक्सप्रेस मौलाना साद को बचाने की कोशिश कर रहा है? इन सब सवालों का जवाब तो नहीं पता लेकिन एक बात तो साफ है के द इंडियन एक्सप्रेस खबर से ज्यादा प्रोपेगेंडा को महत्व देता है।

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