नासा ने घोषणा की है कि वह 2023 में वाइपर मिशन लॉन्च करेगा। यह एक लूनर मिशन है। नासा यह समझने के लिए इस मिशन को भेज रहा है कि क्या चंद्रमा पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके वहां मानव जीवन यापन को संभव बनाया जा सकता है।
वाइपर मिशन का पूरा नाम वोलेटाइल्स इन्वेस्टिगेटिंग पोलर एक्सप्लोरेशंस रोवर है। यह एक मोबाइल रोबोट यानी गतिशील रोबोट है। यह मिशन 100 दिनों का होगा।
इसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। यह रोवर सौर ऊर्जा से चलता है। यह किसी अन्य खगोलीय पिंड पर भेजा जाने वाला पहला रिसोर्स मैपिंग मिशन है।
इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा पर स्थित संसाधनों की मैपिंग करना, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र के बारे में एक्सप्लोरर करना और चंद्रमा की सतह पर स्थित पानी एवं अन्य संभावित संसाधनों के बारे में पता लगाना है।
नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए इससे एक अहम कदम माना जा रहा है। दरअसल यारों व चंद्रमा पर पानी एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता एवं इसके उपयोग के बारे में बता कर आर्टेमिस प्रोग्राम की लैंडिंग साइट को निर्धारित करने में मदद करेगा।
नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत 2024 तक पहली महिला एवं अगले पुरुष को चंद्रमा पर भेजने की योजना बनाई है। चंद्रमा पर कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग दुनिया के पहले व्यक्ति हैं। नील आर्मस्ट्रांग अपोलो 11 मिशन के तहत 1969 में चंद्रमा पर गए थे। चंद्रमा की सतह पर पहला रोवर सोवियत संघ ने 1959 में भेजा था।