इन दिनों ट्विटर पर बॉयकॉट चाइना का ट्रेंड चल रहा है। कुछ लोगों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और चीन के उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए बॉयकॉट चाइना को ट्रेंड करवाया जिसके बाद कुछ लोग यह ट्वीट करने लगे कि क्या बॉयकॉट चाइना के साथ साथ सरदार पटेल की प्रतिमा को भी बॉयकॉट करना चाहिए क्योंकि सरदार पटेल की प्रतिमा भी मेड इन चाइना है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वाकई में सरदार पटेल की प्रतिमा मेड इन चाइना है या फिर सिर्फ अफवाह फैलाई जा रही है? आइए इसके पीछे की सच्चाई को जानने की कोशिश करते हैं।
सितंबर 2018 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के चित्रकूट की एक रैली में कहा था कि नरेंद्र मोदी गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा बना रहे हैं। जो विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी लेकिन यह मेड इन चाइना होगी। जैसे हमारे जूते और कपड़े मेड इन चाइना होते हैं।
साल 2017 में भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात के एक दौरे में कहा था,” सरदार पटेल की जो प्रतिमा बनाई जा रही है वह चाइना में बनाई जाएगी। इसके पीछे मेड इन चाइना लिखा जाएगा। यह हमारे लिए बड़े शर्म की बात है।”
यह तो हुई सरदार पटेल की प्रतिमा पर राहुल गांधी की टिप्पणी। लेकिन चलिए अब इसकी सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं कि क्या वाकई में सरदार पटेल की प्रतिमा मेड इन चाइना है?
सच्चाई
द सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (SVPRET) ने स्टैचू ऑफ यूनिटी बनाने की जिम्मेदारी लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड को दी थी। लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड एक भारतीय कंपनी है। जिसकी नीव डेनमार्क के दो व्यक्तियों ने रखी है। जिनका नाम लार्सन सोरेन और क्रिस्टियन टर्बो है।
लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड ने अपने एक आधिकारिक बयान में बताया कि स्टैचू ऑफ यूनिटी को पूरी तरह से भारत में ही बनाए जाएगा। केवल ब्रॉन्ज़ प्लेटो को चीन से आयात किया जाएगा। जिसकी कीमत पूरे प्रोजेक्ट के कीमत की 9 परसेंट से भी कम है। ऐसे में स्टेचू ऑफ यूनिटी को मेड इन चाइना बताना केवल राजनीति है। जिसके लिए इन अफवाहों को ट्विटर पर हवा दी जा रही है। अतः यह बात स्पष्ट है कि स्टैचू ऑफ यूनिटी मेड इन इंडिया है।
