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वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए फैलाई जा रहे हैं ये 5 झूठ

कई दफा वीर सावरकर को बदनाम करने की कोशिश की गई। जिसके लिए कुछ नेता और मीडिया ने उनके खिलाफ कई झूठ फैलाने की कोशिश की है। आज हम आपको वीर सावरकर को लेकर फैलाई गई 5 सबसे बड़ी झूठ के बारे में बताने वाले हैं।

1. वीर सावरकर ने दिए दो राष्ट्र के सिद्धांत
यह अफवाह फैलाई गई थी कि वीर सावरकर ने दो राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी। लेकिन वास्तव में दो राष्ट्र के सिद्धांत को एएमयू के संस्थापक सैयद अहमद खान द्वारा पेश की गई थी। उन्होंने कहा था,” हिंदू और मुस्लिम दो अलग-अलग राष्ट्र है। कोई एक दूसरे पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता है।” उन्होंने यह भी कहा था कि मुझे यकीन है हिंदू और मुस्लिम कभी एक राष्ट्र नहीं हो सकते क्योंकि हिंदू और मुस्लिम का धर्म और जीवन व्यापन का तरीका अलग अलग है। जिस वक्त यह बात कही गई थी उस समय सावरकर 5 वर्ष के थे।
2. सावरकर ने 1943 में दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया
वीर सावरकर को लेकर यह फैलाई गई थी कि सन 1943 में वीर सावरकर ने दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया था। लेकिन सच्चाई यह है कि उस वक्त वीर सावरकर का गलत उद्धरण पेश किया गया था। जिसे सावरकर ने सुधार करने को कहा था लेकिन मीडिया ने उस पर ध्यान नहीं दिया। 23 अगस्त 1947 को वीर सावरकर ने एक लेख प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने बताया कि मीडिया ने उनकी बातों को तरीके से पेश किया है। उन्होंने कहा कि दो राष्ट्र सिद्धांत पर हम विचार कर रहे थे लेकिन हमने दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन नहीं किया था। लेकिन पत्रकारों ने इसे गलत तरीके से पेश किया की मैं दो राष्ट्र सिद्धांत को मैंने स्वीकार कर लिया है और इसका समर्थन कर रहा हूं।
3. सावरकर ने भारत विभाजन का समर्थन किया
यह अफवाह फैलाई गई कि वीर सावरकर ने पाकिस्तान और भारत के विभाजन को अपना समर्थन दिया है। लेकिन बी आर अंबेडकर ने अपनी किताब ‘ पाकिस्तान एंड पार्टीशन ऑफ इंडिया’ में बी आर अंबेडकर ने बताया कि हिंदू महासभा ने पाकिस्तान का हमेशा विरोध किया है। मोहम्मद जिन्ना ने कहा था कि भारत को दो हिस्सों पाकिस्तान और हिंदुस्तान में बांट देना चाहिए। लेकिन उस वीर सावरकर ने हमेशा यही कहा था कि भारत को दो भागों में नहीं बांटा जाएगा।
4. विभाजन धार्मिक आधार पर नहीं हुआ
यह अफवाह फैलाई गई थी कि भारत और पाकिस्तान का विभाजन धार्मिक आधार पर नहीं किया गया था। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर ही किया गया था। पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र के रूप में और हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र के रूप में बना था। समझौते के दौरान धर्मनिरपेक्षता का कहीं नामोनिशान नहीं था। इसे 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान में शामिल किया गया।
5. पाकिस्तान के शिया और अहमदी भारत की मदद चाहते थे
यह बात बताई जाती है कि पाकिस्तान के शिया और अहमदी भारत की मदद चाहते थे। लेकिन वास्तव में पाकिस्तान के शिया विभाजन करना चाहते थे और अहमदी ने उनका समर्थन किया था। साथ ही शिया पाकिस्तान में एक ही धर्म को समर्थन करना चाहता था। इसलिए आज भी पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है।

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