कुओं, नदियों, तालाबों और नहरों आदि में डूबने से मृत्यु घोषित करने के प्रस्ताव पर कार्यवाही आगे बढ़ाई गई है। सरकार जल्द ही इस पर निर्णय ले सकती है। इससे प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
राज्य में 22 प्रकार की केंद्रीय और 18 प्रकार की राज्य आपदाएं घोषित हैं। इन आपदाओं के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। लेकिन, कुओं, नदियों, तालाबों, नहरों, नालों और गड्ढों में डूबने से होने वाली मौतों की बड़ी संख्या हर साल आपदा के दायरे में नहीं आती है।
ऐसे में इन आपदाओं से अपनों को खोने वालों को कोई मदद नहीं मिलती। राहत आयुक्त संजय गोयल ने करीब दो महीने पहले कुओं, नदियों, तालाबों, नहरों, नालों और गड्ढों में डूबने से हुई मौतों की घोषणा के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इधर, बाढ़ के दौरान इस तरह की कई घटनाएं सामने आने के बाद प्रस्ताव को गति मिली है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि राजस्व विभाग ने ऐसा प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा है। वित्त विभाग ने राजस्व विभाग से प्रस्ताव पर कुछ जानकारी मांगी है। राजस्व विभाग की प्रतिक्रिया के बाद, वित्त विभाग अपनी सलाह देगा।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर प्रस्ताव तय किया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, 5 जुलाई, 2019 और 13 जनवरी, 2020 के बीच राज्य में डूबने से 380 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद, ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।