महाराणा प्रताप ने अपने जीवन काल में बहुत सी लड़ाइयां लड़ी है। जिसमें हल्दीघाटी की लड़ाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बताया जाता है कि 1568 में मुगलों के साथ हुई लड़ाई में मेवाड़ की पूर्वी क्षेत्र को महाराणा प्रताप ने खो दिया था। लेकिन बाकी का राज्य अभी भी राणा के पास ही था। मुगल शासक अकबर मेवाड़ से होते हुए गुजरात की ओर जाने के लिए एक स्थाई रास्ता चाहता था। जिसके लिए अकबर मेवाड़ को अपनी छत्रछाया में लाना चाहता था।
1572 महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक किया गया था। जिसके बाद मुगल शासक अकबर ने महाराणा प्रताप को कई संदेश भेजें ताकि महाराणा प्रताप भी बाकी राजपूतों की तरह जागीरदार बनने को कहा गया। लेकिन महाराणा प्रताप ने इंकार कर दिया। जिसके बाद 18 जून 1576 को हल्दीघाटी की लड़ाई लड़ी गई। इस युद्ध में अकबर की सेना का नेतृत्व अंबेर के मानसिंह 1 द्वारा किया गया था। महाराणा प्रताप के पास महज 22000 सैनिक थे। जबकि मुगलों का नेतृत्व करने वाले मानसिंह के पास दो लाख सैनिकों की कमान थी। बावजूद इसके महाराणा प्रताप और उनके सैनिकों ने 6 घंटे तक यह लड़ाई लड़ी। जब महाराणा प्रताप ने खुद को जख्मी पाया तो वे वहां से बचकर निकलने में कामयाब हो गए।
हल्दीघाटी में मुगलों की जीत निरर्थक बताया जाता है क्योंकि मुगलों ने महाराणा प्रताप के परिवार के किसी भी सदस्य को पकड़ने में असमर्थ था। जैसे ही मुगलों का ध्यान उत्तरी पश्चिमी भाग में पड़ा वैसे ही महाराणा प्रताप और उनके सैनिकों ने अपने राज्य के पश्चिमी हिस्से में फिर से अपना दबदबा हासिल कर लिया।
महाराणा प्रताप भारत के वीर पुत्रों में से एक थे। महाराणा प्रताप का वास्तविक नाम प्रताप सिंह 1 था। महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ के कुंभलगढ़ में हुआ था। मौजूदा समय में यह जगह कुंभल फोर्ट, राजसमंद डिस्ट्रिक्ट, राजस्थान के नाम से जाना जाता है। महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 को चावंड मेवाड़ में हुआ था। मौजूदा समय में इस जगह का नाम चावंड है जो राजस्थान के उदयपुर डिस्ट्रिक्ट में आता है।
