एक तरफ जहां कोरोनावायरस ने पूरे विश्व में हाहाकार मचा रखा है, वहीं दूसरी तरफ विश्व के कई बड़े-बड़े फार्मास्यूटिकल कंपनी ने कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए अपनी कमर कस ली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन तो ट्रायल के दूसरे फेज तक पहुंच चुका है। साथ ही भारत के पुणे में स्थित सिरम इंस्टीट्यूट इस वैक्सीन को विकसित करने में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ काम कर रही है।
हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने AZD1222 के दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल की घोषणा की है। कई देशों ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इस वैक्सीन के बाकी ट्रायल को अपने देश में करने की अनुमति दे दी है। ब्राजील ने भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। इस वैक्सीन का ट्रायल 10000 व्यक्तियों पर किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट इस वक्त यूके की ऑक्सफोर्ड, अमेरिका के कोडेजेनिक्स और ऑस्ट्रेलिया के बायोटेक फर्म थेमिस द्वारा विकसित की गई वैक्सीन पर काम कर रहा है। ब्रिटिश-स्वीडिश फार्मास्यूटिकल कंपनी ऑस्ट्रेजेनेका ने भारत से हाथ मिलाया है। इस फार्मास्यूटिकल कंपनी ने भारत के पुणे मैं स्थित सिरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वैक्सिंग निर्माण का काम शुरू कर दिया है। इन दोनों ने मिलकर एक अरब कोरोना वैक्सीन तैयार करने की बात कही है। इनका कहना है कि साल 2020 के अंत तक 40 करोड़ वैक्सीन भारत समेत कम आय वाले देशों में पहुंचाने का लक्ष्य इन्होंने निर्धारित किया है।
यह खबर भी सामने निकल कर आ रही है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा पर तैयार की गई वैक्सीन का उत्पादन भारत के पुणे में शुरू हो गया है। अगर यह सफल हुआ तो इस महामारी से पूरे विश्व को उबारा जा सकता है। और अगर इसकी वैक्सीन भारत में बनाई गई तो इससे भारत की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार होगा। कोरोना वायरस की वैक्सीन ना केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए वरदान साबित होगा।
